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उड़ता उड़ेंद्र का खत: डियर अमित, क्या हाल हैं….? 

डियर अमित,
क्या हाल हैं?
मैं तो ठीक ही हूं लेकिन गले में ज़रा खराश है. अब खत का जवाब देते हुए मुलेठी खाने की सलाह मत देना. तुम जानते हो मुझे साल 2015 से ही मुलेठी के नाम से चिढ़ है.
वैसे आजकल तो लगता है कि खराश परमानेंट ही हो जाए तो अच्छा. बोलने का मन ही नहीं करता छोटे. नया कुछ है नहीं और पुराना लोग सुनते नहीं. कपिल और मेरे दिन एक ही साथ खराब हुए. किसी ने कहां सोचा था कि चार ही साल में शो फ्लॉप हो जाएगा.
यूं अब पॉलिटिक्स में वो पहले जैसी बात भी नहीं रही. भक्त तक सवाल करने लगे हैं. भक्तिमार्ग में प्रश्नों की कहां गुंजाइश थी, लेकिन देखो तो कैसे वो भोगड़िया बैठकर मंदिर का हमसे हिसाब ले रहा है. उसे बताओ कि हमने हिसाब झाड़वाणी जी को नहीं दिया, इसे क्या देंगे. ये स्टाफ की भी शर्म नहीं करते यार. एक ही इलाके से आते हैं कुछ तो लोक लिहाज रखो. अब ये सलाह भी अगले खत में मत लिख देना कि इनकी धोती खोलते हुए हमने कौन सी लिहाज रखी थी. अपनी बात अलग है.
दिल्ली में मौसम अजीब सा हो गया है. कभी ठंड सी लगता है, कभी गरमी सी. ऐसा पिछली बार तब महसूस हुआ था जब करन ने इंटरव्यू लिया था. 2019 कौन सा कम बड़ा इंटरव्यू है. अभी ही से हाथ पांव फूल रहे हैं. जैसे एक्ज़ाम से पहले बच्चे घूमना फिरना बंद कर देते हैं वैसे ही मैंने भी दौरे कम कर दिए हैं. सोच रहा हूं अपनी ही लिखी एक्ज़ाम वॉरियर्स भी पढ़ ही डालूं. बड़े सैड मूड में खत लिख रहा हूं छोटे. मूड बदलने के लिए सोचा ट्रंप से बात करूं पर वो आजकल पुतिन को गाली देने में बिज़ी है. मालूम चला कि सीरिया पर हमारा स्टैंड पूछ लिया तो ना इधर के रहेंगे ना उधर के.

अपना स्टैंड तो उन्नाव तक में लड़खड़ा रहा है तो असद पर क्या ले लें.
तुम बताओ कर्नाटक कैसा चल रहा है? नारंगीनाथ को वहां इतना घुमाया पर ये सिद्धारमैया मुझे सिद्ध लग रहा है. इसको भी खूब खरी खोटी सुनाई. अंग्रेजी में चौकस ट्वीट करता है. मैंने नारंगी से कहा कि रोज यूपी में किसी ना किसी बात पर अपनी भद्द पिटवा रहे हो, जाकर कर्नाटक में कुछ आग वाग लगाओ तो किसी दिन कहता है मेरा मौनव्रत है तो किसी दिन कहता है कि आज हवन करने जाना है. ये किसे मुखिया बनवा दिया यार? लुटिया ना डुबवा दे. नज़र रखो इस पर.

वहां मोहतरमा ने मीडिया पर नया फरमान जारी करके सिरदर्द बढ़ा दिया था. मैंने समझाया भी था कि चुनाव से पहले बर्र के छत्ते में हाथ मत डालना. आपका पहले वाला पोर्टफोलियो स्कूल कॉलेज वाला था. टीचर और बच्चों को तो गाइडलाइंस की आदत होती है उनको तो कुछ ना कुछ चिपकाते रहो मगर इन्होंने तो मीडियावालों को भी नसीहतें दे दीं. होना क्या था? फिर उलटी लेनी पड़ी. मीडियावाले किसी की नसीहत लेते हैं क्या? स्साले बिना कोर्ट के जज हैं.वैसे भी भई ये फेक वेक पर काबू करोगे तो हमारे ही हजारों-लाखों आईटी सेल वाले नौजवान पहले बेरोज़गार हो जाएंगे. ज़रूरत क्या है कुछ करने की जब बिना कुछ किए मज़े में हो. कपड़ा वाला भी दिया है ना. वहां बुनो या उधेड़ो हमको क्या!

अच्छा सुना है इस बार कॉमनवेल्थ में इंडिया ने बड़ा सोना जीता है. भाषण लिखनेवाले से कहो कि इसे हमारे न्यू इंडिया प्रोग्राम से जोड़े. हम सोना ना महंगा करते तो खिलाड़ियों को बाहर से सोना जीतने की प्रेरणा ना मिलती टाइप बात लिखवा दो कुछ. और हां देखो फेंकने की प्रतियोगिता हो सकती है क्या? देश के लिए एकाध मेडल तो मैं भी ला ही सकता हूं.

छोटे, आज लंबा लिखने का मूड नहीं है. मुंबई की तरफ जाओ तो मेरे पतंग वाले फ्रेंड को हाय बोल आना. उसी से आसाराम की तबीयत भी पूछ लेना.
अब सोने जा रहा हूं. फोन साइलेंट रखूंगा वरना रात भर मुझे परेशान करने के लिए झाडवाणी जी मिस कॉल मारते रहते हैं.

तुम्हारा मोटा भाई
उड़ता उड़ेंद्र

(यह नितिन ठाकुर कि फेसबुक पोस्ट है)

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