समाज एंव संस्कृति

और इस तरह लालकिला डालमिया को बेच दिया गया…..

BY,कृष्ण कल्पित 

सौदा सस्ता था । एक तो यह कारण रहा होगा डालमिया समूह द्वारा लाल किले को किराये पर लेने का । 25 करोड़ पांच साल के यानी (लगभग) 40 लाख रुपये महीने ।

दूसरा कारण यह रहा होगा कि रामकिशन डालमिया (1893 – 1978) ने छह शादियाँ की थी, जिनके अठारह बच्चे थे । 18 के अब तक अस्सी हो गये होंगे । 80 परिवारों का कुनबा सिर्फ़ लाल किले में ही समा सकता है । संयुक्त डालमिया परिवार के लिये राष्ट्रपति भवन भी छोटा पड़ सकता है ।

डालमिया परिवार को शायद पता नहीं होगा कि दिल्ली में उनके परिवार के कितने बंगले हैं कोलकाता, बनारस, हरिद्वार इत्यादि तो जाने दीजिये । जिस तरह रामकिशन डालमिया को पता नहीं रहता था कि उनके कितने बच्चे हैं । वे अपने बच्चों को नम्बरों से पहचानते थे ।

भारतीय श्रेष्ठियों के इतिहास में रामकिशन डालमिया जैसा रोमांचक, रंगीन और सादा जीवन बहुत कम ने जिया होगा । सिर्फ़ जगत सेठ की याद आती है ।

रामकिशन ने पिता की मृत्यु के बाद कोलकाता की सड़कों पर जीवन व्यतीत किया । दुकानों के होर्डिंग्स पढ़कर बांग्ला और अंग्रेज़ी सीखी । महाजनी तो रगों में थी ही । अपने बलबूते पर दुनिया के बड़े उद्योगपति बने ।

बेनेट कोलमैन कम्पनी डालमिया की थी । डालमिया की बेटी रमा का साहू शांतिप्रसाद जैन से विवाह हुआ था ।

रामकिशन डालमिया महात्मा गांधी, नेहरू से भी नज़दीक थे लेकिन डालमिया की असली दोस्ती जिन्ना से थी । जब दोनों शाम को बेहतरीन स्कॉच और बेहतरीन सिगार पीते हुये विश्व सरकार का स्वप्न देखा करते थे । दुनिया एक देश हो और एक सरकार हो के विचार को डालमिया ने इतना प्रचारित कर दिया कि नेहरू को कहना पड़ा – इस बनिये की बात का विश्वास मत करो इसे सरकारों पर बोलने का हक़ नहीं है ।

यह भी कहा जाता है कि डालमिया का जिन्ना की बेटी से छिपा हुआ इश्क़ था ।

फिरोज़ गांधी ने संसद में जीवन बीमा निगम में हुये घोटाले को संसद में उठाया और नेहरू को जांच बिठानी पड़ी, जिसमें रामकिशन डालमिया आरोपी थे । अभी तक यह बात किसी ने नहीं कही लेकिन मैं कहता हूं कि डालमिया को नेहरू ने व्यक्तिगत कारणों से अंदर करवाया । दो वर्ष रामकिशन ने जेल में बिताये ।

जांच के दौरान इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कहा कि रामकिशन डालमिया की सम्पति इतनी जगह है, अकूत है – इन पर कितना टैक्स बकाया है, उसे कूता नहीं जा सकता ।

जेल जाने से पूर्व डालमिया बेनेट कोलमैन और अन्य महत्वपूर्ण उद्योग अपने दामाद साहू शांतिप्रसाद जैन के नाम इस शर्त के साथ कर गये थे कि बाद में लौटा दी जायेगी जिसे कभी नहीं लौटाया साहू जैन ने ।

रामकिशन डालमिया ने कई किताबें लिखीं । इनकी बेटी रमा जैन ने भारतीय ज्ञानपीठ की स्थापना की । इनकी एक बेटी इला डालमिया हिंदी के कवि अज्ञेय की बरसों संगिनी रहीं और लेखिका बनने की कोशिश करती रहीं । ‘दिनमान’ जैसी साप्ताहिक पत्रिका नहीं निकलती अगर इलाजी नहीं होती ।

रामकिशन डालमिया की एक पत्नी का नाम दिनेशनन्दिनी डालमिया था । वे श्रेष्ठ लेखिका थीं । गद्य-काव्य वैसा कोई नहीं लिख पाया । दिनेशनन्दिनीजी ने पठनीय आत्मकथा भी लिखी है ।

रामकिशन डालमिया शेखावाटी के चिड़ावा क़स्बे में पैदा हुये । मेरे गाँव से 10 किलोमीटर दूर । जब भी रामकिशन डालमिया चिड़ावा आते तो हंगामा हो जाता । हम भी बचपन में उनकी हवेली पर जाते थे ।

कोई खाली हाथ नहीं लौटता था । जो भी रामकिशन के पास आ गया । इतनी अपार सम्पदा छोड़ कर जाने के बाद भी रामकिशन के मरने पर पांच करोड़ का कर्ज़ था, जिससे उन्होनें ग़रीब-गुरबों की सहायता की थी ।

मरने से कुछ पहले अर्ध बेहोशी में रामकिशन डालमिया ने एक काव्यात्मक वसीयत लिखी जिसमें खाली हाथ आया हूँ और खाली हाथ जाऊंगा जैसी बातों के अलावा अपने बेटों को यह भी हिदायत दी है कि वे विवाह व्यापक हिन्दू समाज में ही करें और इसमें जैनी शामिल नहीं हैं ।

लाल किला तो रामकिशन डालमिया के पोतों-पड़पोतों ने ख़रीदा है लेकिन चरखी दादरी तो रामकिशन ने आज़ादी के पहले ही ख़रीद ली थी ।

डालमिया के अलावा लालकिला ख़रीदने की कूवत किस में है !

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