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हजारों किसानों का सैलाब मुंबई की सड़कों पर, विधानसभा घेरने की तैयारी

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नासिक से छह मार्च को ‘लॉन्ग मार्च’ पर निकले महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों के 35,000 से अधिक किसान रविवार को मुंबई पहुंचे। ठाणे से होकर किसान अब मुंबई में विधान भवन पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। कर्जमाफी और उचित मूल्य की मांग कर रहे किसानों की योजना महाराष्ट्र विधानसभा घेरने की है।

आंदोलनकारी किसान सोमवार को विधान भवन जाकर अपनी मांगें रखेंगे। हालांकि, पुलिस का कहना है कि किसानों को आजाद मैदान पर ही रोक दिया जाएगा। उधर, सोमवार को किसानों के विधानसभा घेराव को लेकर पुलिस ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है।

ऑल इंडिया किसान सभा की प्रदेश परिषद के अध्यक्ष किसान गुजार ने कहा कि हम पूर्ण ऋणमाफी, उपज के उचित दाम आदि को मांग को लेकर सोमवार को विधानभवन का घेराव करेंगे।

किसानों के प्रदर्शन के बीच रविवार रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने आवास वर्षा में एक हाई लेवल मीटिंग ली। इस बैठक में किसानों के मुद्दों पर विचार के लिए फडणवीस ने 6 सदस्यीय कमिटी का गठन किया है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे किसानों की मांगों के प्रति सकारात्मक रहें. हाई पावर कमिटी में गिरीश महाजन, चंद्रकांत दादा पाटिल, सुभाष देशमुख, पांडुरंग फुंडकर, विष्णु सावरा और एकनाथ शिंदे शामिल हैं।

किसान नेता ने कहा कि ये मुद्दा सिर्फ किसानों का नहीं है बल्कि इसमें आदिवासियों का भी अधिकार निहित है। फॉरेस्ट एक्ट 2005 में आया लेकिन आदिवासियों को उनकी ज़मीन का अधिकार नहीं मिला, अभी भी लाखों किसानों की ज़मीने जंगलों के बीच में हैं, ये ज़मीनें उनके पूर्वजों की हैं लेकिन फिर भी उन ज़मीनों का मालिकाना हक उन्हें नहीं मिला है, कानून इनके साथ है तब भी वे परेशानी क्यों उठाएं?

ऑल इंडिया किसान सभा के नेतृत्व में आंदोलनरत किसान राज्य सरकार के कर्ज माफी योजना के सही क्रियान्वयन, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसान की उपज का सही दाम दिलवाने और ओला वृष्टि से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।

भाजपा सरकार की ओर से 34,000 करोड़ रुपए की सशर्त कर्ज माफी की घोषणा के बाद से अब तक 1,753 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर’किसान विरोधी नीति अपनाने का आरोप लगाया। साथ ही ये विभिन्न प्रोजेक्टों के लिए भूमि अधिग्रहण का भी विरोध कर रहे हैं।

एआईकेएस के महासचिव अजीत नवाले ने कहा कि 180 किलोमीटर लम्बी पदयात्रा की शुरुआत लगभग 12,000 किसानों के साथ हुई थी और अब यह संख्या 30,000 तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि किसानों के बीच बढ़ते असंतोष की इस बात से समझा जा सकता है।

 

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