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GST पर जितने रंग मोदी सरकार ने बदले उसे देखकर गिरगिटो की प्रजाति भी शर्मिंदा है

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GST को लेकर सरकार ने जबरदस्त पलटी मारी है, अब महीने में तीन रिटर्न के स्थान पर महीने में 1 रिटर्न की प्रक्रिया को अनुमति दे दी गयी है यह अगले छह महीने में लागू हो जाएगा यानी कि सरकार ने अब स्वयं मान लिया है कि जो प्रक्रिया जल्दबाजी में अपनाई गयी थी वह गलत थी,

इस त्रुटिपूर्ण व्यवस्था से जो देश को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है उसकी भरपाई कौन करेगा ?, इस सरकारी मूर्खता से जो देश का छोटा व्यापारी हैरान परेशान हुआ है उसकी भरपाई कैसे होगी ? , लोगो ने जो सॉफ्टवेयर खरीद लिए है उसमें कैसे चेंज होंगे ?

यह भी सम्भव है कि बड़े पैमाने पर छोटे व्यापारियों ने अपने GST नम्बर सरेंडर करने के आवेदन दिए है इसलिए घबरा कर सरकार को यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है

जीएसटीएन अब एक सरकारी कंपनी होगी जिस तरह से डेटा की सुरक्षा प्रश्नचिन्ह लगाया जा रहा था उसे लेकर सरकार को यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा GSTN का प्राइवेट हाथो में प्रबन्धन देना सरकार की बहुत बड़ी चूक थी इस ओर पिछले साल सुब्रमण्यम स्वामी ने भी प्रश्न उठाए थे और सोशल मीडिया पर हम जैसे लेखकों ने भी इस संबंध अनेक लेख लिखे था

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब भी जीएसटी कॉउंसिल की बैठक होती हैं हर बार पेट्रोल डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की जाती हैं लेकिन सरकार हर बार जनता को अगली बार फैसला करेंगे कह के बेवकूफ बना देती है इस बार की बैठक में भी पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का कोई प्रस्ताव नहीं आया है।

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