तस्वीर कुछ कहती है

बारिश में भीगते हुए, कुर्सियॉं सर पर रखकर इमरान प्रतापगढी को घंटों सुनती रही चतरा झारखंड की अवाम

भारत देश में कवि सम्मेलन और मुशायरों की एक गौरवशाली परम्परा है और कवियों और शायरों के लिये दीवानगी का भी अपना एक अलग जादू है ।

राहत इंदौरी, मुनव्वर राना, वसीम बरेलवी, सुरेंद्र शर्मा से लेकर कुमार विश्वास तक के चाहने वालों का एक अलग अंदाज है, लेकिन नई नस्ल के बग़ावती तेवर वाले शायर इमरान प्रतापगढी की दीवानगी सबसे निराली है, 18 जून की रात झारखंड के चतरा में आयोजित मुशायरे में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा,

इमरान प्रतापगढी के माइक पर आते ही बारिश और ऑंधी ने मुशायरे को अस्त व्यस्त कर दिया, लेकिन हज़ारों की भीड पर इमरान का जादू कुछ ऐसा था कि लोगों ने बारिश से बचने के लिये कुर्सियॉं अपने सर पर रख लीं और इमरान से सुनाने की जिद करते रहे ।

इमरान ने खुद अपने फेसबुक पेज पर इस मुशायरे में अवाम से मिले प्यार का यूँ शुक्रिया अदा किया है

चतरा में मुहब्बतों का एक ऐसा भी नज़ारा था, पॉंच मिनट गुज़रा था माइक पर आये हुए कि तेज़ तूफ़ान और बारिश से हमें लगा कि मुशायरा ख़त्म हो जायेगा लेकिन चाहने वालों की दीवानगी भी अपनी हदें पार कर रही थीं, अवाम ने बारिश की तेज़ धार से बचने के लिये कुर्सिया सरों पर रख कर उसे छत बना लिया और कहा कि बस इमरान भाई आप पढते रहो………अवाम की मुहब्बत का जादू कुछ ऐसा था कि ऐसे मौसम में भी एक घंटा चालीस मिनट तक मुसलसल सुनाता रहा

हज़ारों की भीड में कोई पोस्टर लेकर आया था तो कोई पहलू ख़ान की मॉं को गले से लगाये हुए मेरी तस्वीर फ्रेम करवा कर लाया था !!
ज़िंदगी का अनूठा और यादगार मुशायरा

कल रात झारखंड में रघुवर दास से कह कर आया हूँ

आपका जो ये सूबा है….आपका जो ये सूबा है

 

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