क्राइम

कठुआ कांड: फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे, मंदिर से मिले सबूत पुख्ता

कठुआ गैंगरेप केस में घटनास्थल से मिले सबूतों को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. दिल्ली की फॉरेंसिक लैब ने इस मामले से जुड़े सभी सबूतों की जांच की है और उसे सही बताया है.

दिल्ली FSL की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर में मिले खून के धब्बे पीड़िता के ही हैं. जांच में इस बात की पुष्टि हो जाने से ये बात तो साफ हो गई है कि 8 साल की बच्ची से मंदिर के अंदर ही रेप किया गया था.

बताया जाता है कि इन पुलिसकर्मियों ने सबूतों को मिटाने की कोशिश की. उन्होंने पीड़ित बच्ची के सलवार फ्रॉक को धो डाला था, ताकि उस पर कोई खून का धब्बा न बचे.

ये पुलिसवाले अपने मकसद में सफल भी हो जाते, क्योंकि एसआईटी ने जब ये कपड़े श्रीनगर फॉरेंसिक लैब भेजे गए, तो वह कोई पुख्ता राय देने में नाकाम रहा था. हालांकि इसके बाद एसआईटी ने दिल्ली के फॉरेंसिक लैब की मदद ली.

1 मार्च को पीड़िता के जननांगों से मिले वजाइनल स्मियर, उसके बाल और पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया और आरोपी शुभम सांगरा के खून के नमूने को सात अलग-अलग पैकेटों में बंद करके दिल्ली भेजा गया था.

इसके बाद 14 दिनों के बाद मृतक बच्ची के सैंपल और एक और आरोपी के खून के नमूने भेजे गए. इसके बाद 16 मार्च को बच्ची के सलवार फ्रॉक, मौका ए वारदात के आसपास की कुछ मिट्टी और बच्ची के खून से सनी हुई मिट्टी भेजी गई. उसमे बाद 21 मार्च को आरोपी विशाल जंगोत्रा के खून के नमूने दिल्ली भेजे गए, इसके बाद दिल्ली की फॉरेंसिक लैब ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी.

मंदिर से मिले बाल की लड़ि‍यों की जांच करने पर मालूम चला की उसकी DNA प्रोफाइल इस मामले के एक आरोपी शुभम सांगरा से मिलती है.

साथ ही रिपोर्ट में इस बात की भी पुष्टि हुई है कि बच्ची के कपड़ों पर मिले खून के धब्बे उसके DNA प्रोफाइल से मैच करते हैं. दिल्ली एफएसएल ने पीड़ित बच्ची के यौनांग में खून पाए जाने की बात रिपोर्ट में पुष्ट की है.

आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में कठुआ जिले के रासना गांव में बकरवाल समुदाय की 8 साल की बच्ची को 10 जनवरी में अगवा किया गया था। एक हफ्ते बाद घर से कुछ दूर उसका शव बरामद हुआ था। 10 अप्रैल को दायर पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, बच्ची की गैंगरेप के बाद हत्या की गई थी

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