अंतरराष्ट्रीय न्यूज़

भारत-पाकिस्तान संयुक्त युध्दाभ्यास मोदी का ‘मास्टरस्ट्रोक’ है या चीन का

BY,गिरीश मालवीय

देश मे पाकिस्तान के जनक जिन्ना की तस्वीर पर इतना गुस्सा निकाला जा रहा है और उधर इस खबर पर कोई चू तक नही कर रहा कि चीन के दबाव में आकर भारत पाकिस्तान के साथ सयुंक्त युध्दाभ्यास को राजी हो गया है जो सितंबर में रूस चीन की सीमा पर यूराल पर्वतमाला में होने जा रहा है

संयुक्त युध्दाभ्यास दोस्त देशों के साथ किये जाते हैं यह दो देशों के मध्य भरोसे को परिलक्षित करते हैं लेकिन देश के प्रधानमंत्री ने निराली उलटबांसी चलाई हैं

आपको याद होगा ज्यादा दिन नही गुजरे है जब लंदन में मोदी जी सर्जिकल स्ट्राइक की बात कर पाकिस्तान को ललकार रहे थे लेकिन चीन पुहचते ही उनके रुख में आश्चर्यजनक परिवर्तन आ गया ओर वह इस संयुक्त अभ्यास के लिए राजी हो गए, यह चीन की बढ़ती ताकत के प्रति आत्मसमर्पण वाला रुख 56 इंच की छाती की बात करने वाले को किस प्रकार शोभा देता है यह तो भक्त ही अच्छी तरह से बता पाएंगे

विगत 23 अप्रैल को पाकिस्तान ने राजौरी व पुंछ में नियंत्रण रेखा पर भारतीय सैन्य चौकियों व रिहायशी इलाकों पर गोलाबारी की थी पाकिस्तान ने भारत के बॉर्डर पर बसे कई गांवों को भी निशान बनाया था। इसमें कई लोगों की जान चली गई थी और काफी लोग जख्मी भी हुए थे जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के पांच सैनिकों को मार गिराया ओर आज खबर आती है कि हमारी सेना ओर पाकिस्तान की सेना कंधे से कंधा मिलाकर तोप के गोले बरसाने जा रही है

इस देश मे यदि पाकिस्तान की टीम खेलने आ जाए तो पिच तक खोद दी जाती है यदि कोई पाकिस्तानी कलाकार हिंदी फिल्मों में एक्टिंग कर ले तो निर्माताओं को फ़िल्म रिलीज के लिए राष्ट्रवादी पार्टियों के नेताओ के हाथ पाँव जोड़ने पड़ जाते हैं, पिछले महीने ही भारत ने एशिया कप की मेजबानी करने से इनकार कर दिया क्यो कि उसमें पाकिस्तान भी हिस्सा ले रहा था

ऐसे माहौल में संयुक्त युध्दाभ्यास के लिए राजी होना क्या नाक कटाने की बात नही मानी जानी चाहिए, साफ दिख रहा है कि मोदीजी शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य बनने को उतावलापन दिखा रहे हैं और यही चाइना डोकलांम के मुद्दे पर भारत को लाल लाल आंखे दिखा चुका है, चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स लगातार भारत के विरुद्ध आग उगल रहा था

चीन हमेशा से ही भारत के खिलाफ पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा होता आया है चीन के दबाव में भारत सरकार ने एक निजी नोट भेजा जिसमें अधिकारियों से तिब्बत से दलाई लामा के निर्वासन के 60 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम से दूर रहने को कहा गया
ओर चाइनीज लड़ियो के बहिष्कार का आव्हान करने वाले संगठन मुँह में दही जमा कर के बैठे हुए है

वैसे सबसे मजे की बात यह कि यह सयुंक्त युध्दाभ्यास आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी पहल के रूप प्रचारित किया जा रहा है……… कुछ दिन पहले हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी कह रहे थे कि जो देश आतंकवाद निर्यात करने को अपना पेशा बना चुके हों, उन्हें जवाब देना भारत को आता है……..

बहुत अच्छा जवाब दिया है मोदीजी आपने !

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