इनसे मिलिए

डॉ. बशीर बद्र से मिलने भोपाल पहुँचे इमरान प्रतापगढ़ी

Imran pratapgarhi meets dr baseer

पिछले दिनों एक वीडियो ने साहित्य जगत को झकझोर के रख दिया था, ETV और NDTV ने गुज़रे ज़माने के मशहूर शायर पद्म श्री, यश भारती प्राप्त डॉ बशीर बद्र के अकेलेपन और गुमनाम हो जाने को लेकर एक स्टोरी किया था, इस स्टोरी ने उर्दू शायरी के शौकीन लोगों को अंदर तक हिला दिया था कि किस तरह कभी मुशायरे की दुनिया पर राज करने वाले बशीर बद्र भोपाल में एक गुमनामी की ज़िंदगी जी रहे हैं, बीमारी की हालत में आवाज़ और समझ दोनों ने साथ छोड दिया है। सबसे बडी हैरत की बात तो ये कि मुशायरे की दुनिया और शायर बिरादरी ने भी बशीर साहब को लावारिस छोड दिया है।

जिन महफ़िलों की कभी बशीर बद्र सदारत करते थे आज वहॉं उनका ज़िक्र भी नहीं होता। शायरों की आपसी कलह और गुटबंदी ने एक बाकमाल शायर को मौत से पहले ही ज़िंदा लाश बना दिया है।
वीडियो अपने फेसबुक पेज पर अपलोड करते हुए नौजवान शायर इमरान प्रतापगढी ने कुछ दिन पहले ही प्रशंसकों से वादा किया था कि जल्द ही बशीर साहब से मिलने भोपाल आऊँगा, कल इमरान बशीर बद्र से मिलने और उनका हालचाल  लेने भोपाल उनके घर पँहुचे।

घरवालों से बहोत देर तक बात की और डॉ. बशीर बद्र से मिलने के लिये आते रहने का वादा किया । इमरान ने अपने ट्विटर और फेसबुक पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा है

न जी भर के देखा न कुछ बात की
बडी आरज़ू थी मुलाक़ात की ।

बहोत देर तक उनके कमज़ोर से हाथों को अपने हाथों में थामे बैठा रहा, न मैं कुछ बोल सकता था न वो कुछ सुन सकते थे !!

Imran pratapgarhi meet dr baseer badr in bhopal

इस दौर के सबसे बडे शायर डॉ. बशीर बद्र साहब के घर रहा बहोत देर, उनके बेटे तैय्यब बद्र ने जब उनका शेर सुनाया

“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाये”

सुनकर बशीर साहब एक बेचैन सी मुस्कराहट के साथ लम्बी सी ख़ामोशी में चले जाते हैं !

अल्लाह बशीर साहब को हम सब के भी हिस्से की थोडी थोडी उम्र दे दे !

इमरान के इस क़दम को उर्दू शायरी के चाहने वालों ने सोशल मीडिया पर बहोत सराहा है, उनके पेज पर आये सैकडों कमेंट में लोगों ने इमरान को दुआयें देते हुए लिखा है कि आपका इस तरह अपने बुज़ुर्ग शायर के घर जाना बहोत अच्छी शुरूआत है.

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