अभी अभी

हाथों में तिरंगा लिये गाता हुआ एक बाग़ी शायर – मेरे मौला मेरे भारत को सलामत रखना

imran pratapgarhi celebrating independence day of india

मेरे मस्कन मेरी जन्नत को सलामत रखना

मेरे मौला मेरे भारत को सलामत रखना !!

इसकी मिट्टी पे हर एक रीत निछावर कर दूँ

अपनी धडकन के सभी गीत निछावर कर दूँ !

गंगा जमुना तेरी लहरों की मुकद्दस धुन पर

सारी दुनिया का मैं संगीत निछावर कर दूँ !!

इस वतन से मेरी निस्बत को सलामत रखना

मेरे मौला मेरे भारत को…..

सोचता हूँ तो मेरी ऑंख छलक जाती है

मुल्क से रूह का रिश्ता बडा जज़्बाती है !

मेरे आक़ा ने मदीने में कहा था ये कभी,

हिंद की सम्त से इक ठंडी हवा आती है !!

मेरे ईमॉं की अक़ीदत को सलामत रखना

मेरे मौला मेरे भारत को….


मुस्कराती हुई तहज़ीब को गुमसुम किया है,

तुमने भारत की फ़ज़ाओं को जहन्नुम किया है !

मेरे भारत से मेरा रिश्ता कुछ इस तरह का है

हमने इस मुल्क की मिट्टी से तयम्मुम किया है !

इतनी पाकीजा इबादत को सलामत रखना

मेरे मौला मेरे भारत …..

तुमने नफ़रत का जो बाजार सजाया हुआ है,

तुम ये कहते हो मुसलमान पराया हुआ है !

आओ दिल चीर के दिखलाऊँ वतन का नक्शा

मेरा भारत ! मेरी सॉंसों में समाया हुआ है !

मेरी रूहानी मुहब्बत को सलामत रखना

मेरे मौला मेरे भारत को ………

नफ़रतों का लिये तिरपाल चले जाओ तुम,

बाद की छोडो इसी साल चले जाओ तुम !

हमको लाहौर कराची से भला क्या मतलब

तुमको जाना है तो नेपाल चले जाओ तुम !

मेरे पुरखों की विरासत को सलामत रखना

मेरे मौला मेरे भारत को…

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