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इमरान….!!! उम्मीद की एक किरण हैं…. एक दिया जो आंधियों से दुश्मनी मोल ले बैठा है।

हिंदुओं की नजर में.. मुस्लिमों की नजर में.. एक आम हिन्दुस्तानी की नजर में और… उनकी नजर में जिनका खुद का कोई स्पष्ट नजरिया ही नहीं..

एक बेहद सुलझे हुए सीधे साधे सच्चे इंसान को पहेली सा कर दिया है लोगो ने.. अपने ऊल जलूल सवालों में उलझा कर उन्हें खुद एक पेचीदा सवाल बना दिया है लोगो की नजर में.. भरोसे की जगह उनके नाम उनकी शख्सियत पर एक प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है…

हाँ वो मुसलमान हैं.. लेकिन सिर्फ मुसलमान या कट्टर मुसलमान नहीं.. फर्क समझिये आप… और यही फर्क कुछ लोगों को रास नहीं आता.. धर्म मजहब से ऊपर उठकर हक़ बात करना ही तो गुनाह है ना सबकी नजर में…अधिकांश हिंदू एकमत हैं कि वो हिन्दू विरोधी हैं.. कुछ मुस्लिम कहते हैं कि वो कौम की दलाली कर रहे हैं.. झूठी हमदर्दी दिखा रहे हैं.. और एक आम अमनपसंद इंसान जो हालातों और नफरतों से तंग आ चुका है उसके लिए इमरान उम्मीद की एक किरण हैं.. एक दिया जो आंधियों से दुश्मनी मोल ले बैठा है देश की बेहतरी के लिए.. जिसे हर पल जूझना है किसी ना किसी से.. वो सबके हैं पर फिर भी सबके निशाने पर हैं.. जिन्होंने कभी खुद कीसी प्यासे को पानी ना पिलाया होगा उन्हें भी जवाब चाहिए कि इमरान ने कौम के लिए क्या किया..??

ये जहर उगलती जुबानें सुन कर लगता है कि इन्हें समय समय पर धार दी जाती है ताकि इमरान के सारे प्रयासों उनकी सच्चाई को झुठलाया जा सके.. उनके खिलाफ एक सोची समझी साज़िश के तहत.. उनका कोई भी वीडियो उठा कर देख लीजिये अगर आप एक लफ़्ज़ भी ऐसा ढूंढ सकें जिसमे उन्होंने किसी को भड़काने की कोशिश की हो..या हिंदुओं के खिलाफ बोला हो.. हाँ वो नफरत और बिगड़ते हालातों के खिलाफ बोलते हैं तो ये तो इंसानियत के पक्ष में हुआ ना… विरोध में कैसे.. अपनी कौम का कुछ भला करना दूसरे का बुरा करने से अलग है बिल्कुल.. वो तो हमेशा कहते हैं कि अच्छे लोगों को पहचानिये उन्हें ताकत दीजिये.. फिर उन्हें ही तोड़ कर रख देने की ये कोशिशें क्यों….?? एक नेक इंसान से ऐसी भी क्या जलन..??

आखिर कहाँ से आती हैं ये नफ़रतें.. वहाँ से जहां मानवता और विवेक कट्टरता और नासमझी के नीचे कुचल दिए जाते हैं..?? जिनको जवाब सुनने की लायकी नहीं वो सवालों की बरसात किये जा रहे हैं.. बड़ी अजीब सी जंग छेड़ बैठे हैं वो.. सबके लिए लड़ रहे हैं और अपनों के लिए अपनों के ही वार झेलते जा रहे हैं.. उनके 2.5 लाख रुपये तो लोगों को सोने ही नही देते.. कभी तो थकते होंगे.. मायूस होते होंगे.. हिम्मत टूटती होगी.. खुद ही के आंसू सवाल करते होंगे.. पर फिर भी शिकायत नहीं किसी से.. मंजिल दूर है.. सफर लंबा है.. रुकने से या होश खोने से काम नहीं चलेगा.. सब्र,, गंभीरता और समझदारी का ही तो नाम है इमरान…

इमरान के पास रब का दिया वो सब है जिसका एक आम इंसान ख्वाब देखना चाहे.. मैंने इतना पागलपन इतनी दीवानगी किसी के लिए नहीं देखी… पर इसका नशा कभी नहीं चढ़ा उन पर… और उनकी मेहनतों का यही हासिल लोगों की नजर में उन्हें कांटे सा खटकाए जा रहा है.. वो किसी के विरोधी नहीं हैं.. वो आपके अपने हैं बस आप उन्हें अपनाना नहीं चाहते.. बस मौका मिलते ही आपके लफ़्ज़ खंजर में बदल जाते हैं..

समझ से काम लीजिये.. अपनी ही राहें मुश्किल क्यों कर रहे हैं..?? जो आपका हाथ थाम कर चुभते तीरों के आगे आपकी ढाल बना खड़ा है उसी की पीठ में आप छुरा घोंपने चले आते हैं वो भी सुनी सुनाई बातें ले कर… आपके 2-4 हाथ छूट जाएंगे तो उन्हें फर्क नहीं पड़ेगा वो अल्लाह की नजर में बेदाग हैं.. पर अगर उन्होंने आपका हाथ छोड़ दिया तो अपने आंसू फिर आप कौम के असली हिमायती लोगों से ही पोंछवाइएगा……

-आशना जयहिन्द

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