अर्थव्यवस्था

ATM में कैश की भारी किल्लत, फिर से नोटबंदी जैसे हालात

देश के कई राज्यों में एक बार फिर से नोटबंदी जैसा असर देखने को मिलने लगा है। पिछले कुछ दिनों से कई राज्यों में एटीएम में पैसे की तंगी से लोग लम्बी कतारों में खड़े दिख रहे है। इसके साथ ही कही तो ऐसा मंजर भी है कि लोगों को लम्बे इंतजार के बाद भी निराश हो ना पड़ रहा है। एटीएम में जरुरत के आधार पर पैसे ही उपल्ध नहीं है।

कई छोटे शहरों में एटीएम खाली हैं और बाहर ‘नो कैश’ का बोर्ड लगा है। कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से एटीएम में कैश न उपलब्ध होने से फिर नोटबंदी जैसी परेशानी का माहौल बनने लगा।

रिजर्व बैंक के सूत्रों का कहना है कि अब अर्थव्यवस्था में नकदी की हालत नोटबंदी के पहले वाले दौर से भी बेहतर है, ऐसे में इस संकट की वजह दूसरी है।

रिजर्व बैंक के सूत्रों का कहना है कि असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में लोगों के जरूरत से ज्यादा नकदी निकालने की वजह से यह संकट खड़ा हुआ है।

रिजर्व बैंक के सूत्रों ने बताया है कि त्योहारी मांग की वजह से कैश की कमी हुई है। जितनी जरूरत थी उतना कैश सप्लाई नहीं हुआ है लेकिन स्थिति अब सामान्य हो रही है। रिजर्व बैंक के मुताबिक एक दो दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी।

मुख्यमंत्री शिवराज ने दो हजार के नोटों के गायब होने पर आरोप लगाया है कि इसके पीछे बड़ी साजिश रची जा रही है। हालांकि, उन्होंने इस संदर्भ में केंद्र सरकार से बातचीत करने की बात कही और कहा कि राज्य सरकार इससे सख्ती से निपटेगी।

किसानों को संबोधित करते हुए शिवराज ने कहा कि नोटबंदी से पहले 15 लाख करोड़ रुपये की नकदी का चलन था, लेकिन अब यह करीब 16 लाख करोड़ रुपये के पास पहुंच गया है, लेकिन बाजार से दो हजार के नोट गायब किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “लेकिन दो-दो हजार के नोट कहां जा रहे हैं, कौन दबाकर रख रहा है, कौन नकदी की कमी पैदा कर रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि दिक्कतें पैदा हों।

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