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नोटबंदी व जी.एस.टी. की मार देखनी है, तो कालीन उद्योग के गढ़ भदोही आईये

नोटबंदी व जी.एस.टी की मार देखनी है तो कालीन उद्योग के गढ़ भदोही आइये. पिछले एक साल मे बहूत कुछ बदल चुका है यहाँ. बीस-तीस साल मेहनत कर बुनकर किसी तरह जमा-पूंजी जोड़ एक छोटा सा कारखाना लगा सकने मे सफल हुए थे लेकिन सरकारी फैसले ने उन्हें फिर से मजदूर बना दिया है. हजारो मजदूरों का पलायन, काम की कमी, मजदूरी मे गिरावट औऱ कर्ज के बढ़ते बोझ ने छोटे व्यापारियों को महानगरों मे रोजगार के लिए ढ़केल दिया है.

5 जून 2014 को चुनाव प्रचार के लिए मोदी जी यहाँ आये थे. लोग आज भी उनके किये वादे को नही भूला पा रहे हैं. उन्होंने कहा था की “हम कालीन उद्योग को उस ऊंचाई पर ले जाएंगे जहाँ आप कालीन बनाएंगे और विदेशी खरीदार आपके दरवाजे पर लाइन लगा कर खरीदने को खड़े रहेंगे. लेकिन उनके हर वादे की तरह ये भी एक वादा ही निकला, उसके उलट मोदी सरकार की नीतियों ने इस असंगठित कारोबार को बर्बाद कर दिया है.

फोटो मे आप जिस व्यक्ति को देख रहे हैं ये मनसा राम जी हैं. गोपीगंज थाने के अंतर्गत आने वाले दीवानपुर गाँव के निवासी. कालीन व्यापार मे दूसरी पीढ़ी व स्वयं पिछले 54 सालों से बुनाई कर रहे हैं. 54 सालों की कमाई बस इतनी है कि दो कमरे का पक्का मकान बना पाए हैं. हर दिन लगभग 14 घंटे काम करने के बाद मुश्किल से 200 रुपये कमा पाते हैं. इनकी मेहनत व उससे मिलने वाली मजदूरी देश के श्रम कानून पर कालिख समान है. बात-चीत करने के सिलसिले मे बताते हैं कि 2014 मे मोदी को वोट दिए थे ये सोच कर की बाजार थोड़ा ठीक हो जाएगा लेकिन धागे पर 5% का जी.एस.टी सारे मुनाफे को खा जारही है. 2019 मे मोदिया के एकदम्मे वोट ना करब बिटवा. मै पूछ बैठा की इतने सालों से वोट कर रहे हैं अबतक का सबसे अच्छा नेता कौन लगा? उत्साहित होकर उन्होंने बताया कि “बिटवा एगो रहलीं इंदिरा गांधी आउर दूसर फूलन देवी”. बताता चलूं की इंदिरा गांधी ने भदोही मे इंदिरा मिल की स्थापना की थी जिससे पूरे भदोही के बुनकरों को रोजगार मिलता था लेकिन मुख्यमंत्री रहते हुए राजनाथ सिंह ने इसे प्राइवेट हाथो बेच दिया. मनसा राम जी ने बताया कि फूलन का नेता रहीं, पैंट-कुर्ता पहिन, माथे पर पट्टी बांधे घूमती थी. बाबू लोगन के मजाल था कि काम न दें या कम पैसा दें लेकिन बेचारी चली गई, कुछ दिन आउर रह जाती तो हमनी के भला हो जाता.

बनारस से 40 किलोमीटर दूर बुनकरों की स्मृतियों मे अभी भी अपने नेता की गहरी छाप बैठी हुई है. हर आने वाले चुनाव मे वो शायद अपने उन्हीं नेताओं को ढूंढते हैं. लेकिन राजनीति अब बदल चुकी है, राज्यपाल साहब पूरे 10 घंटे ब्रह्मकुमारी के कार्यक्रम मे बिता देते हैं लेकिन बाहर खड़े बुनकरों को देख गाड़ी का सीसा तक नीचे नही करते.

( पंकज कुमार )

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