विशेष रिपोर्ट

तकलीफ एक बीजेपी आईटी सेल वाले की…..

BY, दीपक असीम

मैं उस लड़के को जानता था। दवा की दुकान पर ही दिखता था। अकसर तो घर के लिए सर्दी जुकाम की गोलियां ही लेता था, मगर इस बार जो पर्चा उसने दुकानदार को दिया उसमें डिप्रेशन की दवाएं थीं। मैंने पूछा – ये डिप्रेशन की दवाएं किसके लिए। उसने दाएं बाएं देखा और कहा अंकल मेरी ही हैं।

मैं उसे पकड़ कर चाय की दुकान में ले गया। उससे तफसील से पूछताछ की। उसने बताया कि वो भाजपा की आईटी सेल में काम करता है। डिप्रेशन का कारण भी यही काम है। इसी काम से चार साल पहले उसे बहुत उर्जा मिलती थी। उसे लगता था कि वो देश के हित में कुछ कर रहा है। देशप्रेम के जोश में वो कांग्रेसियों को गाली देता था। फेक आईडी से कुछ भी करो, कोई पकड़ नहीं सकता। झूठी खबरें भी बनाता था।

तब उसे लगता था कि ये देशसेवा है। मोदी जी पीएम बनेंगे तो देश का विकास होगा, भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, हर शख्स को पंद्रह पंद्रह लाख रुपये मिलेंगे। उसके घर में पांच लोग हैं, उसने पिचहत्तर लाख का हिसाब भी लगा लिया था। मगर फिर यह हुआ कि कुछ नहीं हुआ।

वो अब भी आईटी सेल में काम करता है। उसने बताया कि पहले जब हम मोदी की तारीफ में कुछ लिख कर डालते थे, तो जनता की तरफ से बहुत उत्साह भरा जवाब मिलता था। मगर अब मोदी की तारीफ में एक पोस्ट डाल दो, तो विरोध में गाली भरे कमेंट्स की बाढ़ आ जाती है। हमें सबका जवाब देना पड़ता है।

हमें भी पता है कि जनता का गुस्सा वाजिब है, मगर क्या करें? काम है, सो करना पड़ता है। दिन भर कांग्रेस के खिलाफ हम झूठ गढ़ते हैं जबकि हमारी भी उम्मीद अब कांग्रेस पर ही टिकी है। हम आईटी सेल वाले खुद इस बार कांग्रेस को वोट देंगे, हमारे घर वाले कांग्रेस को वोट देने वाले हैं, मगर यह छह आठ घंटे जो मोदी और भाजपा सरकार की तारीफ करनी पड़ती है, यह भारी पड़ती है।

कुछ काम तो ऐसे होते हैं कि खुद से नफरत पैदा होने लगती है। आसिफा के रेप और मर्डर के बाद जब सोशल मीडिया पर दुख भरे कमेंट्स की बाढ़ आई तो हमें काम मिला कि आसिफा जैसी मासूम को आतंकवाद की समर्थक बताया जाए और इंसाफ मांगने वालों को देशद्रोही साबित किया जाए। अब बताइये जो भी ये काम करेगा, उसे खुद से नफरत होगी या नहीं? कई बार तो ऐसा जी चाहता है कि कुछ खाकर मर जाऊं।
मैंने उस लड़के को दिलासा दिया। कहा कि चार साल झेला है, तो एक साल और झेल लो। फिर तो ये अच्छे दिन गारंटी से जाने ही वाले हैं। मेरी बात सुनकर उसकी आंखों में चमक पैदा हो गई। कहने लगा अंकल आप तो बीजेपी को वोट नहीं देंगे? मैंने कहा नहीं पिछली बार भी नहीं दिया था। अब तो हरगिज नहीं।

उसके चेहरे पर उम्मीद की एक चमक झलक उठी कहने लगा बस एक साल और झेलना है, फिर इस पाप से मुक्ति मिलेगी। दूसरी जगह भी मैं जॉब ढूंढ ही रहा हूं। मिल जाए तो यह डिप्रेशन खत्म हो। मैंने कहा मै भी देखूंगा तुम्हारे लिए कोई काम हो तो।

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